Thursday, September 13, 2018

बैंकों का एनपीए बढ़ने के लिए कौन ज़िम्मेदार

बैंकों ने जितना लोन दिया उस लोन का जितना हिस्सा बहुत देर तक नहीं लौटता है तो वह नॉन परफार्मिंग असेट
हो जाता है  जिसे एनपीए कहते हैं
एनपीए को लेकर यूपीए बनाम एनडीए हो रहा है  लेकिन जिसने इन दोनों सरकारों में लोन लिया या नहीं चुकाया उसका तो नाम ही कहीं नहीं आ रहा है
2015 में जब आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने भारतीय रिज़र्व बैंक से पूछा था कि लोन नहीं देने वालों के नाम बता दीजिए तो रिजर्व बैंक ने इंकार कर दिया था
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नाम बताने के लिए कहा था क्या यह अजीब नहीं है कि जिन लोगों ने लोन नहीं चुकाया उनका नाम राजनीतिक दल के नेता नहीं लेते हैं  न प्रधानमंत्री लेते हैं न राहुल गांधी लेते हैं न अमित शाह नाम लेते हैं
क्या यह मैच फिक्सिंग नहीं है  असली खिलाड़ी बहस से गायब है और दोनों तरफ के कोच भिड़े हुए हैं
इस साल 6 अप्रैल को लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने बताया कि 31 मार्च 2015 तक सरकारी
बैंकों का एनपीए 2 लाख 67 हज़ार करोड़ था.
30 जून 2017 तक सरकारी बैंकों का एनपीए 6 लाख 89 हज़ार करोड़ हो गया. 21 में से 11 सरकारी बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक की स्क्रूटनी में हैं. इनका एनपीए 15 प्रतिशत से ज़्यादा है
2015 से 2017 के बीच चार लाख करोड़ एनपीए बढ़ गया. कितना हिस्सा यूपीए के समय का है, एनडीए के समय का है, यह नहीं मालूम  न कोई बोल रहा है न कोई पूछ रहा है
मई 2018 में इंडिया स्पेंड ने एक आर्टिकल छापा था कि भारतीय कंपनियों और व्यक्तियों पर 4 लाख करोड़ से कुछ अधिक लोन एनपीए है  इसमें निजी लोन है कार लोन है हाउस लोन है कोरपोरेट लोन भी है
अगर यह पैसा चुका दिया जाए तो इससे आठ राज्यों के किसानों का कर्ज़ा माफ हो सकता है फिर भी 32 प्रतिशत पैसा बच सकता है

SHARE THIS

0 Comment to "बैंकों का एनपीए बढ़ने के लिए कौन ज़िम्मेदार "

Post a Comment

GOOGLE