Thursday, September 6, 2018

नोटा क्या है, नोटा मतदान चिन्ह का इतिहास, What Is NOTA, full form, election symbol meaning In Hindi

आजकल NOTA (None Of The Above) का बड़े जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है और लोग बड़े उत्साहित हैं कि अगर हमे किसी भी पार्टी का कोई भी उम्मीदवार पसंद नही आयेगा तो हम NOTA का बटन दबा देंगे ! लेकिन उन्हे शायद यह मालूम नही है कि यह पूरी तरह अर्थहीन और बेकार ही साबित होगा,

कुछ साल पहले अगर चुनाव में खड़े उम्मीदवारों में से कोई भी उम्मीदवार किसी मतदाता को काबिल नहीं लगता था, तो मतदाता अपना वोट देने नहीं जाया करते थे और ऐसे में वो अपने मतदान का इस्तेमाल करने से वंचित रह जाते थे. लेकिन अब हमारे देश के नागरिकों को मतदान करते समय ‘नोटा’ का विकल्प दिया जाने लगा है और इस विकल्प का इस्तेमाल वोटिंग के दौरान कई लोगों द्वारा किया भी जा रहा है.

NOTA का बटन दबाने का सीधा सीधा मतलब आज की तारीख मे बिल्कुल ऐसा ही है मानो कि आप घर से निकलकर वोट देने ही नही गये ! इसलिये जिन लोगों ने NOTA का बटन दबाया है और जिन लोगों ने किसी भी वजह से अपना वोट नही दिया है, उन दोनो मे कोई अंतर नही है !

नोटा क्या है (What Is NOTA and Meaning)
नोटा शब्द का नाता चुनाव से है और इसका इस्तेमाल कोई भी नागरिक अपना मत डालते हुए कर सकता है. अगर मतदाता को अपना वोट डालते समय ऐसा लगता है कि उसके यहां से खड़े हुए किसी भी पार्टी का उम्मीदवार, जीतने के काबिल नहीं है, तो वो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन या ईवीएम में दिए गए नोटा बटन को दबा कर अपना मत किसी भी उम्मीदवार को ना देने का विकल्प चुन सकता है. वहीं वोटों की गिनती के समय उस मतदाता का डाला गया वोट नोटा में गिना जाता है.

नोटा का पूरा नाम (NOTA Full Form)
नोटा का फूल फॉम ‘नन ऑफ द अबब’ होती है और इसे हिंदी में “इनमें से कोई भी नहीं” कहा जाता है. वहीं वोटिंग मशीन में ये आपको नोटा का रूप में लिखा हुआ मिलता है और इसका बाकायदा एक निशान भी मशीन पर बना होता है.

नोटा का इतिहास (History)
नोटा का सबसे पहले इस्तेमाल संयुक्त राज्य अमेरिका में किया गया था और साल 1976 में इस देश के नेवादा राज्य में हुए इलैक्शन में वहां के लोगों को यह विकल्प दिया गया था. जिसके बाद अन्य देशों ने भी धीरे धीरे इस विकल्प को अपने देश के मतदातों को देना शुरू कर दिया था.

भारत में इसका इस्तेमाल कब किया गया था (When Was NOTA First Used In India)
साल 2009 में नोटा को वोटिंग के दौरान शामिल करने को लेकर भारत के चुनाव आयोग ने एक अर्जी उच्चतम न्यायालय में दी थी और इस अर्जी में भारत के चुनाव आयोग ने नोटा बटन को ईवीएम मशीन में जोड़ने की बात कही थी.
हालांकि उस वक्त की केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग का इस फैसले में साथ नहीं दिया था और सरकार इस विकल्प को ईवीएम मशीन में नहीं जोड़ना चाहती थी. वहीं पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज जो कि एक गैर-सरकारी संगठन था, उसने चुनाव आयोग के नोटा के विकल्प को वोटिंग के दौरान जोड़ने के फैसले का समर्थन किया था.
साल 2013 में नोटा को लेकर उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया था और उच्चतम न्यायालय भी इसके पक्ष में था. जिसके बाद से इस विकल्प को ईवीएम मशीन में जोड़ दिया गया था और लोगों को कोई भी उम्मदीवार काबिल ना लगने पर अपना मत उनको ना देने का अधिकार मिल गया था.
उच्चतम न्यायालय से नोटा को मंजूरी मिलने के बाद पांच राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में इसे प्रथम बार इस्तेमाल किया गया था और इन राज्यों में 15 लाख से ज्यादा लोगों ने इस विकल्प का इस्तेमाल भी किया था. इन चुनाव के बाद साल 2014 में हुए लोकसभा के चुनावों में भी ईवीएम मशीन में इस विकल्प को जोड़ा गया था.

नोटा का चिह्न (Nota Symbol)
ईवीएम पर बने इसके चिह्न में एक मतपत्र है और उस पर एक क्रॉस का निशान बनाया गया है. इस चिह्न को 18 सितंबर 2015 को चुनाव आयोग द्वारा चुना गया था. और इस चिह्न को गुजरात के राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, द्वारा बनाया गया था.

किन देशों में नागरिकों को दिया जाता है नोटा का विकल्प (Which other countries allow NOTA?)
भारत के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी नोटा का विकल्प वोटरों को वोट डालते समय दिया जाता है और इस वक्त कोलंबिया, यूक्रेन, ब्राजील, बांग्लादेश, फिनलैंड, स्पेन, स्वीडन, चिली, फ्रांस, बेल्जियम और ग्रीस जैसे देशों में इसका प्रयोग किया जा रहा है. इन देशों के अलावा अमेरिका अपने देश में इसका इस्तेमाल कुछ मामलों में करने की अनुमति देता है.

नोटा का विकल्प मिलने से उन लोगों को अपने मत का उपयोग करने का हक मिल गया है जो कि अपना पसंदीता उम्मीदवार ना होने के कारण अपना वोट डालने से वंचित रह जाते थे.

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