कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट बनी सोनिया ने क्यों किया कंपनी के फाउंडर को ब्लैकमेल.पुलिस ने मामले के तीन आरोपियों को हिरासत में लेने के लिए अदालत में आवेदन दिया है. गिरफ्तार किए गए तीन लोगों में सोनिया धवन भी हैं.
विजय शेखर की निजी सहायक के रूप में पेटीएम कंपनी में काम करती थी. सोनिया की फेसबुक प्रोफाइल पर जाएं तो वहां पेटीएम के मालिक विजय शेखर पर अखबारों में छपे तमाम आर्टिकल्स दिखेंगे, साथ में तस्वीरें भी. महज कुछ दिनों पहले तक सोनिया फेसबुक पेज के जरिए पेटीएम का प्रमोशन करती नजर आती हैं.
उनके फेसबुक पेज में उन्होंने पेटीएम में खुद को कम्युनिकेशंस वाइस प्रेसिडेंट बताया है. साथ ही ये स्लोगन - 'कड़ी मेहनत ही सबकुछ है बाकि तो सबकुछ थ्योरी (Hard work is glory, everything else is theory).' वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की पढ़ी हैं. सोनिया धवन एक महीने पहले ही पेटीएम में कम्युनिकेशंस वाइस प्रेसीडेंट के पद पर प्रोमोट की गईं थीं.
सोनिया को पेटीएम के मालिक विजय शेखर को ब्लैकमेल कर 10 करोड़ रुपए मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि सोनिया ने पेटीएम फाउंडर को चेतावनी दी थी कि वो कंपनी की गोपनीय जानकारियां लीक कर देंगी. सोनिया के साथ दो साथी रूपक जैन और देवेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है. इसमें रूपक सोनिया के पति हैं.
आठ साल पहले पेटीएम ज्वाइन किया था
सोनिया का करियर रिकॉर्ड बहुत शानदार रहा है. उन्होंने जनवरी 2010 में पेटीएम ज्वाइन किया था. उन्होंने शुरुआत पेटीएम फाउंडर विजय शेखर की सेक्रेटरी के रूप में की थी. फिर वो कंपनी में लगातार तरक्की करती गईं. सोनिया इससे पहले टाइम्स इंटरनेट और केर्न इंडिया में बिजनेस आपरेशंस मैनेजर और कॉर्पोरेट आफिसर के रूप में काम कर चुकी थीं.
कंपनी के 3.2 करोड़ रुपए के शेयर थे पास
वो कंपनी की ओर से वो बड़े-बड़े प्रोग्राम्स में देश-विदेश में शिरकत करती थीं. कंपनी की कई महत्वपूर्ण पोजिशंस उनके पास थीं.
पेटीएम कंपनी की पेरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा भरी गईं जानकारियों के अनुसार, सोनिया के पास नवंबर 2017 में कंपनी के 1400 शेयर थे. इसकी मौजूदा कीमत 3.2 करोड़ रुपए है. वो पेटीएम से सालाना 85 लाख रुपए कमाती थीं.
क्या कहना है सोनिया का
सोनिया धवन का कहना है कि उनके खिलाफ साजिश हुई है, जो विजय शेखर ने रची है. जबकि जांच का कहना है कि वो पिछले दो माह से कंपनी के फाउंडर को ब्लैकमेल कर रही थीं. उनकी नाराजगी की वजह थी कि कंपनी चार करोड़ रुपए लोन देने के उनके अनुरोध को नहीं माना था.
सोनिया के पास कंपनी के अंदर की जानकारियां हैं कि कंपनी पिछले कुछ सालों में कैसे आगे बढ़ी. उन्हें चुप रहने के लिए दो बार भुगतान भी हुआ. लेकिन सोनिया का फेसबुक और ट्विटर पेज देखकर लगता है कि इस पूरी कहानी में कई और बातें भी हैं, जो सामने आनी बाकि है
विजय शेखर की निजी सहायक के रूप में पेटीएम कंपनी में काम करती थी. सोनिया की फेसबुक प्रोफाइल पर जाएं तो वहां पेटीएम के मालिक विजय शेखर पर अखबारों में छपे तमाम आर्टिकल्स दिखेंगे, साथ में तस्वीरें भी. महज कुछ दिनों पहले तक सोनिया फेसबुक पेज के जरिए पेटीएम का प्रमोशन करती नजर आती हैं.
उनके फेसबुक पेज में उन्होंने पेटीएम में खुद को कम्युनिकेशंस वाइस प्रेसिडेंट बताया है. साथ ही ये स्लोगन - 'कड़ी मेहनत ही सबकुछ है बाकि तो सबकुछ थ्योरी (Hard work is glory, everything else is theory).' वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की पढ़ी हैं. सोनिया धवन एक महीने पहले ही पेटीएम में कम्युनिकेशंस वाइस प्रेसीडेंट के पद पर प्रोमोट की गईं थीं.
सोनिया को पेटीएम के मालिक विजय शेखर को ब्लैकमेल कर 10 करोड़ रुपए मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि सोनिया ने पेटीएम फाउंडर को चेतावनी दी थी कि वो कंपनी की गोपनीय जानकारियां लीक कर देंगी. सोनिया के साथ दो साथी रूपक जैन और देवेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है. इसमें रूपक सोनिया के पति हैं.
आठ साल पहले पेटीएम ज्वाइन किया था
सोनिया का करियर रिकॉर्ड बहुत शानदार रहा है. उन्होंने जनवरी 2010 में पेटीएम ज्वाइन किया था. उन्होंने शुरुआत पेटीएम फाउंडर विजय शेखर की सेक्रेटरी के रूप में की थी. फिर वो कंपनी में लगातार तरक्की करती गईं. सोनिया इससे पहले टाइम्स इंटरनेट और केर्न इंडिया में बिजनेस आपरेशंस मैनेजर और कॉर्पोरेट आफिसर के रूप में काम कर चुकी थीं.
कंपनी के 3.2 करोड़ रुपए के शेयर थे पास
वो कंपनी की ओर से वो बड़े-बड़े प्रोग्राम्स में देश-विदेश में शिरकत करती थीं. कंपनी की कई महत्वपूर्ण पोजिशंस उनके पास थीं.
पेटीएम कंपनी की पेरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा भरी गईं जानकारियों के अनुसार, सोनिया के पास नवंबर 2017 में कंपनी के 1400 शेयर थे. इसकी मौजूदा कीमत 3.2 करोड़ रुपए है. वो पेटीएम से सालाना 85 लाख रुपए कमाती थीं.
क्या कहना है सोनिया का
सोनिया धवन का कहना है कि उनके खिलाफ साजिश हुई है, जो विजय शेखर ने रची है. जबकि जांच का कहना है कि वो पिछले दो माह से कंपनी के फाउंडर को ब्लैकमेल कर रही थीं. उनकी नाराजगी की वजह थी कि कंपनी चार करोड़ रुपए लोन देने के उनके अनुरोध को नहीं माना था.
सोनिया के पास कंपनी के अंदर की जानकारियां हैं कि कंपनी पिछले कुछ सालों में कैसे आगे बढ़ी. उन्हें चुप रहने के लिए दो बार भुगतान भी हुआ. लेकिन सोनिया का फेसबुक और ट्विटर पेज देखकर लगता है कि इस पूरी कहानी में कई और बातें भी हैं, जो सामने आनी बाकि है

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