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Sunday, October 04, 2020

FACULTY DEVELOPMENT PROGRAM HELD AT IPEC ON INNOVATION MANAGEMENT

Sunday, October 04, 2020 0
विगत सप्ताह जनपद के इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज में 26 सितंबर से 30 सितंबर तक इनोवेशन प्रबंधन विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन आयोजन ईडीसी आईपेक के तत्वाधान में किया गया जिसका शुभारंभ डॉ. मोहित गंभीर, इनोवेशन डायरेक्टर, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, डॉ. बी.सी. शर्मा डायरेक्टर आईपैक, डॉ मुकेश मोहनिया डीन इनोवेशन एंड रिसर्च सेल,ट्रिपल आईटी दिल्ली श्रीमती प्रियंका डी. गुप्ता, प्रमुख इडीसी ,आइपेक आदि ने किया ।


 जिसमें डॉक्टर मोहनिया ने इनोवेशन की महत्ता, श्री बोहितेश मिश्रा ने तकनीकी इनोवेशन ,श्री गोविंद शर्मा ने बौद्धिक संपदा अधिकार ,श्री दीपक साहू ने इनोवेशन स्ट्रेटजी , डॉ संजय धीर ने कोलैबोरेशन तथा नेटवर्क, डॉ राजकुमार सिंह ने प्रबंधन तथा अनुसंधान एवं विकास ,डॉ लक्ष्मी मीरा ने प्रोडक्ट तथा सर्विस प्रबंधन, श्री संतोष गुप्ता ने कैपचरिंग वैल्यू फ्रॉम इनोवेशन, श्री मुथु सिंगाराम ने इनोवेशन इन ऑपरेशंस एंड प्रोसेस, श्री विपिन कुमार ने अपॉर्चुनिटी इन कमर्शियल ऑपरेशंस ऑफ इनोवेशन ,तकनीकी इनोवेशन के प्रबंधन प्रवीण पचौरी ने 

तकनीकी में इनोवेशन की महत्ता तथा श्री गजेंद्र सिंह ने मानसिक और भावनात्मक विकास, स्ट्रेस मैनेजमेंट तथा ह्यूमन वैल्यूज पर बात की तथा कोविड-19 के दौर में रोजगार के अवसर सृजित करने पर भी बात हुई कार्यक्रम में ग्रोथ ऑफ इनोवेशन, वोकल फॉर लोकल और स्टार्टअप जैसे मुद्दों पर बात हुई सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और विचारों का आदान प्रदान किया गया जिसमें 150 से अधिक प्रतिभागी मौजूद रहे ।इसकी समन्वयक श्री प्रियंका डी. गुप्ता जी और प्रबंधक श्री मुकुल जैन जी रहे ,छात्र समन्वयक पुनीत सैनी और प्रफुल्ल भट्ट रहे।


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Wednesday, July 22, 2020

Corona made Indian Education system really sick

Wednesday, July 22, 2020 0
कोरोना से बीमार हुआ शिक्षा तंत्र 
(Corona made Indian Education system really sick)

अब इसे मज़बूरी समझा जाए या बीमारी हर कोई इस कोरोनावायरस से परेशान नजर आ रहा है अब चाहे वो ठिकाना तलाश रहे प्रवासी मजदूर हों या फिर अपने वतन लौटने को तरस रहे अप्रवासी भारतीय, चाहे वो हालात से जूझती सरकार हो या मुद्दे की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेंकता विपक्ष । परेशान दुनिया का हर छोटा बड़ा देश , देश का हर छोटा बड़ा तबका है । इन्हीं में से एक तबका ऐसा ही है जो इस देश की सबसे बड़ी समस्या से लड़ रहा है और वो तबका है हीलाहवाली के शिकार शिक्षा तंत्र (Education System) से परेशान इस देश का विद्यार्थी वर्ग । 

औपचारिकता किस हद तक बढ़ गई है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिनों पहले परीक्षा को जान से ज्यादा कीमती बताने वाले एक सम्माननीय यूनिवर्सिटी के उप कुलपति बाद में  छात्रों से कहते हैं की जैसे आप हैं वैसे हम , हमें परीक्षा के बारे में कुछ नहीं पता ।

रोज़ सुबह अखबार में एक तरफ खबरें आती है कि इतने नए संक्रमित इतनी मौतें और साथ में एक खबर और कि परीक्षा(Examinations) कराने पर विचार कर रहा यूजीसी(U.G.C)। खबर प्रकाशित होते ही आग जैसी लग गई , आग लगना भी जायज थी ! कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति जिम्मेवारी लेने से कतरा रहा था । जहां एक तरफ कुछ शीर्ष विदेशी शिक्षा संस्थान जैसे हार्वर्ड (Hayward), ऑक्सफोर्ड(Oxford)तथा मिशिगन(Mishigun University) विश्वविद्यालय जहां  ऑनलाइन कोर्सेज फ्री कर रहे थे वहां दूसरी तरफ हिंदुस्तान के अखबारों में खबरें आ रही थीं कि हर हाल में होगी परीक्षा । डर परीक्षा का नहीं था डर फेल होने का भी नहीं था डर इस बात का था कि हमारी जान का क्या होगा ? ट्विटर(twitter) पर हर रोज़ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे ! हर रोज़ #noexamsincovid #promotestudents जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे ।हर रोज़ डीएम(D.M.)से लेकर सीएम(C.M.) तक ज्ञापन सौंपे जा रहे थे पर कोई भी शीर्ष अधिकारी बयान देने तक से कतरा रहा था ।

मुहिम तेज हुई तो देश के एक आधार स्तंभ यानि देश की मीडिया ने मामला संज्ञान में लिया और बात आगे पहुंचाई। और आखिर कार यूजीसी यानी कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) ने फैसला लिया कि अंतिम वर्ष के अलावा सभी की परीक्षाएं रद्द होंगी । यह विजय थी छात्रों की यह विजय थी लाचारी पर न्याय की यह विजय थी शिक्षा कि परंतु यह बात अब भी विचारणीय है और जायज भी कि कब तक भारत का शिक्षा तंत्र इसी तरह लाचार रहेगा ?  कबतक भारत में हर हर छात्र मौलिक समस्याओं का शिकार रहेगा ? कब तक देश में काग़ज़ी परीक्षाएं छात्रों का भविष्य निर्धारित करेंगी ? आखिर कब तक?

लेखक - प्रफुल्ल भट्ट । (Prafull Bhatt)
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Sunday, June 21, 2020

21 जून 2020 अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 June 2020 International Yoga Day

Sunday, June 21, 2020 1
21 जून 2020 अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 June 2020 International Yoga Day)
योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "यूज़" से हुआ है जिसका अर्थ "एकता या बांधना" है। योग द्वारा शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। लगभग 5000 वर्ष पूर्व योग भारत से बौद्ध धर्म के साथ चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एशिया और श्रीलंका में पहुँचा ।
Instagram - @yog_tapasya 
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत- (Starting of International Yoga Day)
27 सितंबर 2014 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Prime Minister Narendra Modi) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा(U.N. Assembly) में योग की महत्वता को बताते हुए एक साथ योग करने की बात रखी थी। तत्पश्चात 11 दिसंबर 2014 को 193 संदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राज्य अमेरिका(U.S.A.) सहित 177 से अधिक देशों के समर्थन के साथ 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस(International Yoga Day) के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। ऐसा पहली बार हुआ कि किसी प्रस्ताव को इतना ज्यादा समर्थन मिला था । इसके बाद 21 जून 2015 को पहली बार योग दिवस पूरे विश्व में मनाया गया ।

21 जून को ही क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस -(Why 21 June is celebrated as International Yoga Day)
उत्तरी गोलार्ध में 21 जून सबसे लंबा दिन होता है, साथ ही भारतीय परंपरा के अनुसार ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है जिससे यह दिन बहुत लाभकारी होता है। 

भारत में योग का इतिहास - (Yoga History in Bharat)
शुरू से ही योग भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है । पौराणिक ग्रंथों के अनुसार विश्व के पहले महायोगी भगवान शिव(Lord Shiva) है जो सदैव पद्मासन में बैठकर समाधि में लीन रहते हैं । भगवत गीता में भी योग का वर्णन मिलता है। भागवत गीता में तीन प्रकार के योग का उल्लेख मिलता है - कर्म योग ,भक्ति योग और ज्ञान योग।
वर्तमान योग दर्शन के महर्षि पतंजलि (Maharishi Patanjali) संस्थापक है। महर्षि पतंजलि ने योग के आठ अंग बताया है - यम(Yama), नियम(Niyama), आसन (Asana), प्राणायाम(Pranayaam), प्रत्यहार (Pratyahaar), धारणा (Dhaarna), ध्यान(Dhyaan) एंव समाधि (Samadhi)
19वीं शताब्दी के अंत में स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति एवं योग का परिचय पश्चिमी देशों से कराया । वर्तमान में भारत में बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर, सद्गुरु, बीके शिवानी आदि योग करके स्वस्थ एवं तनाव मुक्त जीवन किस प्रकार से जिया जाए यह ज्ञान संपूर्ण विश्व को बता रहे हैं।

Prachi Bali (Yoga practitioner)
Instagram  - @yog_tapasya 


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Sunday, June 14, 2020

14 जून विश्व रक्तदान दिवस रक्तदान महादान

Sunday, June 14, 2020 3
14 जून विश्व रक्तदान दिवस रक्तदान महादान
14 June-World Blood Donation Day-Blood Donation


14 जून को विश्व रक्तदान दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने पर रक्तदान कर सकता है। 
"आपका रक्तदान किसी को जीवनदान दे सकता है और आपको किसी का जीवन बचाने की संतुष्टि।"

आइये जानते हैं कि विश्व रक्तदान दिवस की शुरुआत कैसे हुई और समझते हैं इससे संबंधित कुछ भ्रांतियाँ :- 

कार्ल लैंडस्टीनर वैज्ञानिक (Karl Landsteiner Scientist)के जन्मदिन के दिन हम विश्व रक्तदान दिवस मनाते हैं। उनका जन्म 14 जून 1868 को ऑस्ट्रिया - Austria में हुआ था। उन्होंने पता लगाया था कि एक व्यक्ति का खून बिना जांच के दूसरे को नहीं चढ़ाया जा सकता क्योंकि सभी मनुष्य का ब्लड ग्रुप (Blood Group) अलग होता है। प्रत्येक व्यक्ति के रक्त में मिलने वाले एक अहम तत्व आरएच फैक्टर (Element RH factor) की खोज की। इसके लिए उन्हें 1930 में नोबल पुरस्कार (Nobel Prize)से सम्मानित किया गया। 

आइये जानते हैं भारत में सबसे ज्यादा बारी रक्तदान करने वाले वल्लभाचार्य पांडेय जी 
(Vallabhacharya Pandey Ji) के बारे में। 

वल्लभाचार्य पांडेय जी ने अब तक 81 बार रक्तदान किया है। 1989 में प्रयागराज मे एक बड़ा ट्रेन हादसा हुआ था। उस दौरान घायलों को बचाने के लिए रेलवे की तरफ से रक्तदान की सिफारिश की गई थी। तब उन्होंने पहली बार रक्तदान किया था। इसके बाद से वह रेग्युलर रक्तदान कर रहे हैं और दूसरों को भी रक्तदान के लिए जागरूक कर रहे हैं। वह बताते हैं कि उनका ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी  ( Prime Minister Narendra Modi ji) जब भी बनारस आते तब रक्तदान शिविर होती हैं और पांडेय जी रक्तदान करते हैं। 

रक्तदान से संबंधित कुछ भ्रांतियाँ:-
Some misconceptions related to blood donation: -

1.रक्तदान दुबले लोग नहीं कर सकते। यह सच नहीं है दुबले लोग रक्तदान कर सकते हैं। बस रक्तदान करने के लिए न्यूनतम वजन 50 किलोग्राम होना चाहिए ।
2. महिलाएं रक्तदान नहीं कर सकती हैं। यह बिल्कुल भी सच नहीं है। रक्तदान करने से पहले हीमोग्लोबिन की जांच होती है, जिन महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होती है, वह रक्तदान नहीं कर सकती। 
बाकी सभी महिलाएं रक्तदान कर सकती हैं।
3. रक्तदान करने से तकलीफ होता है। यह सच नहीं है। रक्तदान बिल्कुल आसान प्रक्रिया है। रक्त लेने के लिए बस एक छोटा सा इंजेक्शन आपकी बाहों में इंजेक्ट किया जाता है, इसका आपको एहसास में नहीं होता है।
4. शाकाहारी लोगों के लिए रक्तदान करना सही नहीं है। धारणा है की मीट खाने वालों को भरपूर आयरन मिलता है लेकिन शाकाहारी लोग भी भरपूर आयरन वाला भोजन कर रक्तदान कर सकते हैं।
5. हमारे शरीर में रक्त सीमित है खून देना सही नहीं। यह तथ्य गलत है हमारी बॉडी में स्टीम सेल्स टूटकर खून के कई घटक बनाते रहते हैं यह सेल्स लगातार बनते हैं क्योंकि यह कुछ घंटों से लेकर 12 दिनों में खत्म हो जाते हैं। 

"Donate your blood for a reason, let the reason to be life."
उम्मीद है कि आप रक्तदान के महत्व को समझेंगे और बराबर रक्तदान करेंगे।

लेखक ~ आकाश मिश्रा
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Tuesday, June 09, 2020

राज्यपाल ने बदला केजरीवाल का फैसला, दिल्ली में होगा अब सबका इलाज

Tuesday, June 09, 2020 4
राज्यपाल ने बदला केजरीवाल का फैसला, दिल्ली में होगा अब सबका इलाज
( Governor changes Kejriwal is decision now everyone will be treated in Delhi )

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अभी हाल ही में प्रवासी और गैर राज्यों से गए और दिल्ली में रह रहे लोगों की जान की कोई परवाह न करते हुए बयान जारी किया था कि दिल्ली में सिर्फ उन्हीं लोगों इलाज और परीक्षण किया जाएगा जो मूल रूप से दिल्ली के निवासी हैं । दिल्ली सरकार के इस फैसले पर केजरीवाल सीधे आलोचकों(critics) के निशाने पर आ गए थे और उन्हें सोशल मीडिया(social media) पर बुरी तरह ट्रोल(troll) किया जा रहा था जो की जायज़ भी है! एक प्रवासी मजदूर या एक गैर दिल्ली वासी जो कि दिल्ली में रहता है क्या उसे हक नहीं की उसे भी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएं ? क्या ये समनता के अधिकार(right of equality) के खिलाफ नहीं है ? इस मौके पर केजरीवाल की ही कुछ पंक्तियां याद आती हैं 
अब ये समानता कहां गई ? अब ये भाईचारा कहां गया ? सबको बस मुद्दे की राजनीति करनी है और अपना वोटबैंक(vote-bank) मजबूत करना है बेचारे प्रवासी और गैर दिल्ली वासियों का वोट इनके किस काम का ? 
पर दिल्ली के राज्यपाल(governor) श्री अनिल बैजल(Sri Anil Baijal) ने केजरी का फैसला बदल कर तारीफ योग्य काम किया है और दिल्ली सरकार को काफी हद तक बचाया भी है । श्री बैजल के अनुसार हम किसी को इलाज या जांच से रोक नहीं सकते ये समानता के खिलाफ है दिल्ली सबकी है तो इलाज भी सबका किया जाएगा और परीक्षण(test) भी । हालांकि मुख्यमंत्री जी की कोरोनावायरस(Covid-19) की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद यह तो स्पष्ट हो गया है कि न तो वे प्रवासी हैं और न ही किसी अन्य राज्य के वरना उन्हें भी किसी अस्पताल से यह कहकर भगा दिया जाता कि आप दिल्ली के नहीं हैं। खैर ! ईश्वर चिरंजीवी केजरीवाल जी को उम्र के साथ साथ थोड़ी सद्बुद्धि दे और कोरोनावायरस से बचाए ।

लेखक - प्रफुल्ल भट्ट ।
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Friday, June 05, 2020

The elephant died in a standing position in the river Velliyar

Friday, June 05, 2020 0

The elephant died in a standing position in the river Velliyar 

A pregnant wild elephant belonging to a National Park in Palakkad met with a very brutal and tragic end after it was fed a pineapple with firecrackers inside. 


The incident has drawn a lot of flak on social media with various celebrities coming forward and condemning the act.

Akshay Kumar posted about the same on his social media feed strongly condemning it and stated that the guilty should be strictly punished a the earliest.

The injured animal didn’t harm anyone or create any havoc despite being in so much pain. The elephant died in a standing position in the river Velliyar. The authorities have stated that the probe is on and the guilty will be punished.





Writer - Saloni Jain


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विश्व पर्यावरण दिवस 2020

Friday, June 05, 2020 0
" विश्व पर्यावरण दिवस "
(WORLD ENVIRONMENT DAY)

विश्व पर्यावरण दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकृति को समर्पित दुनियाभर में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अटूट संबंध है फिर भी हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता है। यह बात चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है।

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टॉकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों को प्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था।इसी कारण प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा|

आज कोरोना और लॉकडाउन के वजह से जहां देश-दुनिया परेशान है वहीं, वर्ष 2019 तक पर्यावरण को लेकर गंभीरता से चिंतित भारत को थोड़ी राहत जरूर मिली है| दो महीने से अधिक चले लॉकडाउन के कारण कारखाने, रास्तों पर दौड़ती गाड़ियां, बहती नदियां व सागर थोड़े स्वच्छ हुए हैं| देशभर के विभिन्न स्थानों से खबर आयी कि आसपास के इलाकों के पर्वत शृंखला देखने को मिली| 


ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि लॉकडाउन के बाद भी यही स्थिति बनी रहेगी या वापस हमारा पर्यावरण हो जायेगा दूषित? विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रभात खबर आपसे अपिल करता है कि अपने आसपास पौधे लगाएं और जल, जंगल और जीवन का स्वच्छ बनाएं| हमारा वातावरण तब ही स्वच्छ रह सकता है जब पर्यावरण के साथ तालमेल बिठा कर हम विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाये|


लेखक ~ शुभम सिंह
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Manu Sharma released in murder case of Jessica Lal

Friday, June 05, 2020 3
जेसिका लाल की हत्या के दोषी मनु शर्मा की रिहाई 
(Manu Sharma released in murder case of Jessica Lal)

2011 में आई विद्या बालन की फिल्म नो वन किल्ड जेसिका तो आपको याद ही होगी। जिसमें अभिनेत्री ने जेसिका लाल की बहन सबरीना का किरदार निभाया था। फिल्म में जेसिका की मौत के बाद उनकी बहन द्वारा किए गए संघर्ष को दिखाया गया था। 

बात है 29 अप्रैल 1999 की साउथ दिल्ली के रेस्टोरेंट में जब जेसिका लाल की शराब परोसने से मना करने पर हत्या कर दी गई थी। वह घर का खर्चा चलाने के लिए मॉडलिंग कर रही थी। जेसिका लाल की हत्या हरियाणा के पूर्व मंत्री विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने की। जेसिका लाल की हत्या के 7 साल बाद दिसंबर 2006 में मनु शर्मा को उम्र कैद की सजा हुई थी।

वह सजा दिसंबर 2023 में पूरी होनी थी, परंतु 17 साल तिहाड़ में गुजारने के बाद जेसिका लाल की हत्या करने वाले मनु शर्मा को 3 साल पहले ही रिहाई मिल गई। जेल में सजा काटने के दौरान ही मनु शर्मा ने अपना कारोबार चलाया जिसमें अखबार, टीवी चैनल और होटल शामिल है। जेल में रहने के दौरान ही उसने शादी की है और वर्तमान में उसका एक बेटा भी है। 

वह 2017 से ही ओपन जेल में रहता था यानी उसे सुबह 8:00 से शाम 8:00 बजे तक जेल के बाहर जाने की इजाजत थी। अप्रैल से ही सोशल डिस्टेंस इन के नाम पर वाह जेल के बाहर था और अब जेल प्रशासन ने अच्छे व्यवहार का हवाला देते हुए 3 साल पहले ही उसे रिहा कर दिया। 

क्या यह दर्शाता नहीं जिसके हाथ में पैसा है उसके हाथ में प्रशासन है? ऐसा हम संजय दत्त के केस में भी देख सकते हैं कि वह बार-बार पैरोल पर बाहर आते थे और मूवी की शूटिंग करते थे। 

मनु लाल की रिहाई के बाद विद्या बालन का रिएक्शन आया है उन्होंने कहा है कि सच कहूं तो ऐसे लोगों की जगह केवल जेल है हो सकता है। वह एक अच्छा इंसान बन गया हो उम्मीद करती हूं, बस अब एक इंसान यही उम्मीद कर सकता है कि जेल में इतना समय बिताने के बाद वह बदल गया हो।


लेखक ~ आकाश मिश्रा

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Thursday, June 04, 2020

इंसानों से हारकर हथिनी ने तोड़ा दम, अक्षय कुमार ने जताया गुस्सा

Thursday, June 04, 2020 1
इंसानों से हारकर हथिनी ने तोड़ा दम, अक्षय कुमार ने जताया गुस्सा
 

जब अभिनेता अक्षय कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया दी और फेसबुक पोस्ट कर अपना गुस्सा जताया और इस पर जल्द से जल्द सजा की मांग की तो लगा कि जैसे कोई  प्रवासी श्रमिक या हिंसा जैसा मुद्दा है पर जब खबर पढ़ी तो होश ही उड़ गए कि इंसान कितना निर्मम और क्रूर हो गया है बात केरल की है जब मानवीय मूल्यों को दरिंदगी के आगे मुंह की खानी पड़ी और इसका खामियाजा भुगतना पड़ा दो मासूम जानों को एक माँ और दूसरा उसके पेट में पल रहे मासूम बच्चे को। आखिर क्या गलती थी उस हथिनी की जिसने भूखी होने के कारण मनुष्य पर विश्वास किया ? क्या गलती थी उस बच्चे की जिसने इस मनुष्य प्रधान धरती को देखने से पहले ही जान गवां दी ? वन विभाग के कर्मियों ने जब देखा तो हथिनी दर्द और जलन से बचने के लिए बीच पानी में खड़ी थी और अपनी मौत को देख रही थी हाथ पैर सुन्न पड़ चुके थे मुंह में उसके आग सा विस्फोट हुआ था फेफड़ों में धुआं भर चुका था शरीर जवाब दे रहा था मुश्किल से बस वह खड़ी हो पा रही थी आंखों से आंसू निकाल रहे थे पैर कांप रहे थे बोल वो सकती नहीं थी  उसकी कोख में पल रहे उसके लाडले ने कल ही उसे अंदर से आहट दी थी अपने पेट में पल रहे बच्चे के लिए जीना चाहती थी और फिर अचानक उससे खड़ा नहीं रहा गया और एकाएक वो पानी में गिर पड़ी और इस क्रूर निर्मम दुनिया से अलविदा कह दिया उसने अपने जीवन में कोई गलती नहीं की बजाय इसके कि उसने इंसान पर भरोसा किया और अनानास को अनानास समझा पटाखा नहीं और अंततः वो ज़िन्दगी से हार गई और इंसान फिर एक बार जीत गया पर सवाल ये है कि क्या हम इतने गिर गए हैं कि हमें अपनी मौज के आगे दूसरों की जान की कोई परवाह नहीं । अगर ये मानव सभ्यता का भविष्य है तो मनुष्य को जीने का कोई हक नहीं आज जितना दर्द इंसान सहन कर रहा है ये उसके खुद के कर्मों का फल है चाहे वो ऑस्ट्रेलिया के जंगलों की आग हो या अब ये दुर्दांत कृत्य सारे मानवीय ही हैं या तो हमें खुद सुधारना होगा या फिर प्रकृति हमसे बदला लेगी और हम विवश होकर अपना ही अंत देखेंगे ।


लेखक - प्रफ़ुल्ल भट्ट


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Tuesday, June 02, 2020

1200 किलोमीटर साइकिल चला, बेटी पिता को ले आयी घर

Tuesday, June 02, 2020 0
1200 किलोमीटर साइकिल चला, बेटी पिता को ले आयी घर
( After 1200 km cycling, the girl with her father reaches to her home )


"कौन कहता है सिर्फ बेटे ही घर का चिराग़ हैं;
बेटियाँ भी घरों को रोशन करती हैं"

लॉकडाउन में एक तरफ 130 करोड़ की जनसंख्या वाला देश घरों में बंद है, वहीं दूसरी ओर एक गरीब मजदूर की बेटी ने ऐसा कार्य कर दिया है की, यदि उसे कलयुग में श्रवण कुमार के नारी अवतार की संज्ञा दें तो ग़लत नहीं होगा! 

13 साल की ज्योति अपने बीमार पिता को  गुरूग्राम से दरभंगा तक साइकिल पर बिठाकर ले आई।
पापा में थी हिचक, बेटी के हौसले ने पूरी कर दी यात्रा "खाने पीने को कोई पैसा नहीं रह गया था. रूम मालिक भी तीन बार बाहर निकालने की धमकी दे चुका था. वहां (गुरूग्राम) मरने से अच्छा था कि हम रास्ते में मरें.  "13 साल की ज्योति ने रोते हुए फ़ोन पर बताया!

ज्योति अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बैठाकर गुरूग्राम से दरभंगा के सिंहवाड़ा स्थित अपने गांव सिरहुल्ली ले आई है! ये 1200 किलोमीटर का सफ़र इस दुबली पतली सी बच्ची के हौसलों के चलते ही संभव हुआ!

आज ज्योति के इस कारनामे पर भले ही पूरे देश को गर्व है परंतु यहां हमे य़ह भी सोचने की आवश्यकता है कि मात्र 13 साल की उम्र में उसे इतना बड़ा फैसला लेने पर क्यूँ मजबूर होना पड़ा? ज्योति द्वारा उस रूम मालिक का व्यहवार जानकर तो मन में यही प्रश्न उठता है कि क्या हमारे समाज में थोड़ी भी करुणा नहीं बची?

 लेखक ~ शुभम सिंह
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