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Friday, October 05, 2018

वीएचपी-संतों का फैसला, केंद्र सरकार से मांग कि राम मंदिर के निर्माण जल्दी करे

सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर से राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़ी विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर मुकदमे की सुनवाई नियमित रुप से शुरू होने से पहले राम मंदिर के निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद यानी कि वीएचपी ने तेवर कड़े कर लिए और शुक्रवार को हुई अहम बैठक में संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने के लिए दबाव बनाने का फैसला लिया है।
                                                     
वीएचपी से जुड़े देश के करीब 40 संतों ने शुक्रवार को दिल्ली में बैठक कर आगे की रणनीति तय की है। बता दें कि संतों की उच्चाधिकार समिति के साथ बैठक में कई संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार के रूख पर नाराजगी जताई और कहा कि अगर केंद्र सरकार कोर्ट में लंबित होने के बाद एससी/एसटी अट्रोसिटी एक्ट को संसद से कानून बना सकती है, तीन तलाक बिल पर अध्यादेश ला सकती है तो राम मंदिर के निर्माण के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता।
चार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद ने बैठक के कहा कि देशभर में लोग पूछते हैं कि क्या सोच कर आप लोगों ने मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया, मंदिर तो बना नहीं। रामलीला मैदान में सभा हो, मोदी जी को उसमें बुलाया जाए। वहीं महामंडलेश्वर डॉ रामेश्वरदास वैष्णव जी महाराज ने मांग करते हुए कहा कि कानून से पहले सरकार तीन तलाक की ही तरह राम मंदिर निर्माण के लिए भी अध्यादेश लाए।
वहीं आपको बताते चलें कि बैठक के दौरान कई संतों ने यह भी याद दिलाया कि 1989 ने पालनपुर में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया था कि केंद्र में जब भी उनकी सरकार आएगी तो वह राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी।
लेकिन संतों की ओर से यह शिकायत की गई कि पिछले 20 साल में दो बार केंद्र में बीजेपी नेतृत्व की सरकार बन चुकी हैं लेकिन अभी तक राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा हुआ है। इतना ही नहीं आपको ये बता दें कि संतों ने यह तय किया कि केंद्र सरकार से वह मांग करेंगे कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर जल्दी ही अध्यादेश लाया जाए और अगले संसद के सत्र में अध्यादेश पर कानून बनाया जाए।

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