रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सरकार के बीच सोमवार को आरबीआई की एक अहम मीटिंग होने जा रही है. इस मीटिंग में गवर्नर उर्जित पटेल 18 बोर्ड मेंबर्स के सामने अपना पक्ष रखेंगे.
आरबीआई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के इन 18 मेंबर में बैंकर्स और सरकारी अधिकारी के साथ देश के प्रतिष्ठित बिजनेस लीडर्स, इकोनॉमिस्ट और एक्टिविस्ट्स भी हैं.
रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल को मोदी सरकार ने ही अपॉइंट किया था. उनसे पहले रघुराम राजन गवर्नर थे, लेकिन उनकी इच्छा होने के बावजूद उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया, इसलिए ये सभी बोर्ड मेंबर्स ये जानना चाहते हैं कि ऐसा क्या हो गया कि अति विनम्र उर्जित पटेल के तेवर बदल गए.
सरकार और उर्जित पटेल में किन चीजों को लेकर है तनातनी
कई मौकों पर या तो गवर्नर उर्जित पटेल या फिर उनके सहयोगी अपने बयानों में आरबीआई की नीतियों को सही ठहरा चुके हैं. रिजर्व बैंक ने बैंकों को आदेश दिया कि बड़े कर्जदारों की तरफ से लोन या किस्त चुकाने में एक दिन की भी देरी होती है, तो तुरंत उसके लिए प्लान तैयार करें. अगर इसका प्लान 180 दिन के अंदर नहीं, तो मामला इनसॉल्वेंसी में भेज दें, लेकिन आरबीआई ने अपने रूख में बदलाव नहीं किया.
रिजर्व बैंक ने 11 बैंकों को निगरानी में डाल दिया. आरबीआई की इस सख्ती से बैंकों की परेशानियां बढ़ गई. ऐसे में सरकार पर भी इसका दबाव बढ़ा. मतलब उन्हें कोई भी बड़ा लोने देने से पहले रेगुलेटर की मंजूरी लेनी ही होगी.
सरकार चाहती थी कि रिजर्व बैंक महंगाई में कमी को देखते हुए ब्याज दरें नरम ही रखे, जिससे कि इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ाया जा सके. लेकिन रिजर्व बैंक की मॉनिटेरिंग कमेटी ने इस साल तीन बार दरें बढ़ा दीं. सरकार यह भी चाहती थी कि वह उसे मिलने वाला डिविडेंड बढ़ा दिया जाए, लेकिन रिजर्व बैंक इसके लिए राजी नहीं था.
बोर्ड में कौन-कौन है मेंबर
रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में 18 सदस्य हैं. हालांकि, इसमें सदस्यों की संख्या 21 तक रखने का प्रावधान है. सदस्यों में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और चार अन्य डिप्टी गवर्नर पूर्णकालिक आधिकारिक निदेशक हैं. इनके अलावा अन्य शेष 13 सदस्य सरकार द्वारा नामित हैं. सरकार द्वारा नामित सदस्यों में वित्त मंत्रालय के दो अधिकारी आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार शामिल हैं.
सरकार ने आरएसएस विचारक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति और को-ऑपरेटिव बैंकर सतीश मराठे को पार्ट 'टाइम नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर्स' के तौर पर भी नामित किया है.
पूरे बोर्ड का गठन आरबीआई एक्ट के तहत हुआ है, जो केंद्रीय बोर्ड को 'जनरल सुपरिटेंडेंट एंड डायरेक्शन ऑफ द रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया' के रूप में परिभाषित करता है. सरकार विभिन्न क्षेत्रों से 10 'नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर्स और 2 ऑफिशियल डायरेक्टर्स को भी अपॉइंट कर सकती है. इसके अलावा आरबीआई के चार रिजनल बोर्ड से चार-चार नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर्स भी शामिल होते हैं.
आरबीआई बोर्ड में ये बिजनेसमैन भी शामिल
आरबीआई की बोर्ड में टाटा ग्रुप के चीफ नटराजन चंद्रशेखरन, महिंद्रा ग्रुप के पूर्व प्रमुख भरत नरोत्तम दोषी, टीमलीज़ सर्विसेज के को-फाउंडर मनीष संभरवाल और सन फार्मा के चीफ दिलीप सांघवी भी शामिल हैं.
रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल को मोदी सरकार ने ही अपॉइंट किया था. उनसे पहले रघुराम राजन गवर्नर थे, लेकिन उनकी इच्छा होने के बावजूद उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया, इसलिए ये सभी बोर्ड मेंबर्स ये जानना चाहते हैं कि ऐसा क्या हो गया कि अति विनम्र उर्जित पटेल के तेवर बदल गए.
सरकार और उर्जित पटेल में किन चीजों को लेकर है तनातनी
कई मौकों पर या तो गवर्नर उर्जित पटेल या फिर उनके सहयोगी अपने बयानों में आरबीआई की नीतियों को सही ठहरा चुके हैं. रिजर्व बैंक ने बैंकों को आदेश दिया कि बड़े कर्जदारों की तरफ से लोन या किस्त चुकाने में एक दिन की भी देरी होती है, तो तुरंत उसके लिए प्लान तैयार करें. अगर इसका प्लान 180 दिन के अंदर नहीं, तो मामला इनसॉल्वेंसी में भेज दें, लेकिन आरबीआई ने अपने रूख में बदलाव नहीं किया.
रिजर्व बैंक ने 11 बैंकों को निगरानी में डाल दिया. आरबीआई की इस सख्ती से बैंकों की परेशानियां बढ़ गई. ऐसे में सरकार पर भी इसका दबाव बढ़ा. मतलब उन्हें कोई भी बड़ा लोने देने से पहले रेगुलेटर की मंजूरी लेनी ही होगी.
सरकार चाहती थी कि रिजर्व बैंक महंगाई में कमी को देखते हुए ब्याज दरें नरम ही रखे, जिससे कि इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ाया जा सके. लेकिन रिजर्व बैंक की मॉनिटेरिंग कमेटी ने इस साल तीन बार दरें बढ़ा दीं. सरकार यह भी चाहती थी कि वह उसे मिलने वाला डिविडेंड बढ़ा दिया जाए, लेकिन रिजर्व बैंक इसके लिए राजी नहीं था.
बोर्ड में कौन-कौन है मेंबर
रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में 18 सदस्य हैं. हालांकि, इसमें सदस्यों की संख्या 21 तक रखने का प्रावधान है. सदस्यों में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और चार अन्य डिप्टी गवर्नर पूर्णकालिक आधिकारिक निदेशक हैं. इनके अलावा अन्य शेष 13 सदस्य सरकार द्वारा नामित हैं. सरकार द्वारा नामित सदस्यों में वित्त मंत्रालय के दो अधिकारी आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार शामिल हैं.
सरकार ने आरएसएस विचारक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति और को-ऑपरेटिव बैंकर सतीश मराठे को पार्ट 'टाइम नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर्स' के तौर पर भी नामित किया है.
पूरे बोर्ड का गठन आरबीआई एक्ट के तहत हुआ है, जो केंद्रीय बोर्ड को 'जनरल सुपरिटेंडेंट एंड डायरेक्शन ऑफ द रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया' के रूप में परिभाषित करता है. सरकार विभिन्न क्षेत्रों से 10 'नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर्स और 2 ऑफिशियल डायरेक्टर्स को भी अपॉइंट कर सकती है. इसके अलावा आरबीआई के चार रिजनल बोर्ड से चार-चार नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर्स भी शामिल होते हैं.
आरबीआई बोर्ड में ये बिजनेसमैन भी शामिल
आरबीआई की बोर्ड में टाटा ग्रुप के चीफ नटराजन चंद्रशेखरन, महिंद्रा ग्रुप के पूर्व प्रमुख भरत नरोत्तम दोषी, टीमलीज़ सर्विसेज के को-फाउंडर मनीष संभरवाल और सन फार्मा के चीफ दिलीप सांघवी भी शामिल हैं.

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