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Thursday, January 03, 2019

2017 में सरकारी दस्तावेजों से दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर मांगने के बाद अब तस्वीर को हटाने का आदेश जारी

2017 में सरकारी दस्तावेजों से दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर मांगने के बाद अब तस्वीर को हटाने का आदेश जारी.
(In order to ask for a picture of Deendayal Upadhyay with official documents in 2017)
राजस्थान सरकार ने सभी सरकारी दस्तावेजों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर हटाने का आदेश जारी किया है. वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने दिसंबर 2017 में सर्कूलर जारी करके सभी विभागों को आदेश दिए थे कि उनके लेटर पैड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का लोगो के रूप में इस्तेमाल करें. अब अशोक गहलोत सरकार ने उस सर्कूलर को वापस ले लिया है.
राज्य के मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग की ओर से दीनदयाल की तस्वीर हटाने का आदेश जारी किया गया. इसके तहत राज्य के समस्त राजकीय विभागों, निगमों,बोर्ड एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं के लेटर पैड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का लोगो के रूप में प्रयोग/मुद्रण करने के संबंध में 11 दिसंबर, 2017 को जारी परिपत्र को वापस लिया जाता है. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वसुंधरा सरकार के कई फैसलों को पलट दिया था. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसानों का कर्ज माफ करने की पात्रता व मापदंड तय करने के लिए अंतर्विभागीय समिति गठित करने, वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने जैसे कई अहम फैसले भी लिए गए थे. मुख्यमंत्री गहलोत यह समिति गठित करेंगे. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक व भूमि विकास बैंक से कर्जमाफी की पात्रता व मापदंड क्या होंगे, इसको लेकर भ्रांतियां फैलाने की कोशिश की गई हैं लेकिन जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी. दो साल के अंदर ही फोटो को हटाने का आदेश जारी किया गया.

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