सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने सील बंद लिफाफे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दिया था. इससे पहले वर्मा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब देने के लिए अधिक वक्त मांगा था.
कोर्ट ने उन्हें तीन घंटे का अतिरिक्त वक्त देते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर मंगलवार को ही सुनवाई होगी.
वर्मा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था, 'हमने जवाब देने के लिए थोड़ा और वक्त मांगा था. हमने दोपहर एक बजे तक बंद लिफाफे में अपना जवाब सेक्रेटरी जनरल को भेज दिया था.' कोर्ट ने 16 नवंबर को वर्मा से कहा था कि उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर वह अपना जवाब सील्ड लिफाफे में सोमवार को कोर्ट में सौंप दें.
सीवीसी जांच की जरूरत उस वक्त पड़ी जब सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. विवाद बढ़ने पर 23 अक्टूबर को दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया था. CBI ने अस्थाना के खिलाफ 15 अक्टूबर को शिकायत दर्ज की थी. वहीं, अस्थाना ने वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव को 24 अगस्त को शिकायत दी थी.
कोर्ट ने उन्हें तीन घंटे का अतिरिक्त वक्त देते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर मंगलवार को ही सुनवाई होगी.
वर्मा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था, 'हमने जवाब देने के लिए थोड़ा और वक्त मांगा था. हमने दोपहर एक बजे तक बंद लिफाफे में अपना जवाब सेक्रेटरी जनरल को भेज दिया था.' कोर्ट ने 16 नवंबर को वर्मा से कहा था कि उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर वह अपना जवाब सील्ड लिफाफे में सोमवार को कोर्ट में सौंप दें.
सीवीसी जांच की जरूरत उस वक्त पड़ी जब सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. विवाद बढ़ने पर 23 अक्टूबर को दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया था. CBI ने अस्थाना के खिलाफ 15 अक्टूबर को शिकायत दर्ज की थी. वहीं, अस्थाना ने वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव को 24 अगस्त को शिकायत दी थी.

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