राजस्थान में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन की संभावनाओं के चलते राज्य विधानसभा चुनाव में दो सांसद और कम से कम आधा दर्जन पूर्व सांसद चुनाव मैदान में हैं.
इस हफ्ते की शुरुआत में जारी कांग्रेस के 151 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और शीर्ष नेताओं के नाम हैं. लोकसभा चुनाव में जीत के प्रति अनिश्चित इन नेताओं ने राज्य की राजनीति में लौटने का फैसला किया है. चुनाव मैदान में उतरे दो सांसदों में से हरीश मीणा कुछ ही दिन पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं.
दूसरे सांसद रघु शर्मा ने अजमेर उप-चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. यह सीट पहले बीजेपी के ही पास थी. रघु शर्मा ने केर्की विधानसभा क्षेत्र से पर्चा भरा है जो कि उनके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है.
कांग्रेस के राजस्थान चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष रघु शर्मा ने इस बात को खारिज कर दिया कि 2019 में हार के डर से कांग्रेस ने सीनियर नेताओं को चुनाव में उतारने का फैसला किया है.
यह बीजेपी का प्रोपेगैंडा है. विधानसभा चुनाव पहले आता है. जब बीजेपी खुद ही कह रही है कि यह 2019 के लिए सेमीफाइनल है तो उन्हें लड़ने के लिए तैयार होना चाहिए. फाइनल के लिए भी हमारे पास मजबूत उम्मीदवार हैं. ऐसा नहीं है कि हम लोकसभा चुनाव को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. हमारा वास्तविक लक्ष्य 2019 में जीत दर्ज करना है.
बाद में उन्होंने इस सीट पर हुए उप-चुनाव में भी भाग नहीं लिया अब वे टोंक से विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं. सचिन पायलट के अलावा सीपी जोशी अशोक गहलोत और गिरिजा व्यास जैसे पूर्व केंद्रीय मंत्री राजस्थान के रण में अपना भाग्य आजमा रहे हैं.
कांग्रेस नेताओं को लग रहा है कि राज्य में उन्हें जीत मिल जाएगी, जबकि वे केंद्र में अपनी संभावनाओं को लेकर संदिग्ध हैं. उम्मीदवार राज्य में लोकप्रिय भावनाओं को लाभ उठाना चाहते हैं और मंत्री बनना चाहते हैं.
विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला करने वाले अन्य पूर्व सांसदों में नरेंद्र बुडानी, लाल चंद कटारिया, खिलदी लाल बैरवा और हरीश चौधरी शामिल हैं.
दूसरे सांसद रघु शर्मा ने अजमेर उप-चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. यह सीट पहले बीजेपी के ही पास थी. रघु शर्मा ने केर्की विधानसभा क्षेत्र से पर्चा भरा है जो कि उनके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है.
कांग्रेस के राजस्थान चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष रघु शर्मा ने इस बात को खारिज कर दिया कि 2019 में हार के डर से कांग्रेस ने सीनियर नेताओं को चुनाव में उतारने का फैसला किया है.
यह बीजेपी का प्रोपेगैंडा है. विधानसभा चुनाव पहले आता है. जब बीजेपी खुद ही कह रही है कि यह 2019 के लिए सेमीफाइनल है तो उन्हें लड़ने के लिए तैयार होना चाहिए. फाइनल के लिए भी हमारे पास मजबूत उम्मीदवार हैं. ऐसा नहीं है कि हम लोकसभा चुनाव को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. हमारा वास्तविक लक्ष्य 2019 में जीत दर्ज करना है.
बाद में उन्होंने इस सीट पर हुए उप-चुनाव में भी भाग नहीं लिया अब वे टोंक से विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं. सचिन पायलट के अलावा सीपी जोशी अशोक गहलोत और गिरिजा व्यास जैसे पूर्व केंद्रीय मंत्री राजस्थान के रण में अपना भाग्य आजमा रहे हैं.
कांग्रेस नेताओं को लग रहा है कि राज्य में उन्हें जीत मिल जाएगी, जबकि वे केंद्र में अपनी संभावनाओं को लेकर संदिग्ध हैं. उम्मीदवार राज्य में लोकप्रिय भावनाओं को लाभ उठाना चाहते हैं और मंत्री बनना चाहते हैं.
विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला करने वाले अन्य पूर्व सांसदों में नरेंद्र बुडानी, लाल चंद कटारिया, खिलदी लाल बैरवा और हरीश चौधरी शामिल हैं.

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