राजस्थान में कांग्रेस को है अपने ही बागी नेताओं से खतरा,करेंगे बीजेपी का बेड़ा पार. 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
बीजेपी और कांग्रेस का चुनाव अभियान चरम पर है. राजस्थान में एक ओर बीजेपी सत्ता बचाने के लिए पुरे प्रयास कर रही है. तो दूसरी तरफ कांग्रेस राज्य में वापसी की उम्मीद लगाए बैठी हुई है. इस बार चुनाव में कांग्रेस को अपने ही बागी नेताओं से खतरा है. कांग्रेस पार्टी से कई नेता निष्कासित हुए हैं. चुनाव के ऐन वक्त पहले पार्टी से निकाले जाने से इन नेताओं में कांग्रेस के प्रति घोर असंतोष है. इस विद्रोह की आग को पार्टी रोकने में नाकाम रही है, जिसका राजनीतिक फायदा उठाना बीजेपी को बखूबी आता है.
बीकानेर सीट इसी का उदाहरण है. पूर्वी और पश्चिमी बीकानेर गंगा शहर रोड पर आकर मिलती है, जिसे जीएस रोड के नाम से जाना जाता है. ये रोड उत्तरी राजस्थान के सबसे बड़े कॉमर्शियल हब को दो हिस्सों में बांटती है. इस बार पूर्वी और पश्चिमी बीकानेर सीट से कांग्रेस से निष्कासित जिला अध्यक्ष गोपाल गहलोत बागी नेता के तौर पर चुनावी मैदान में हैं
कांग्रेस ने राज्य में कुल 15 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है. कहा जाता है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कांग्रेस पार्टी का काफी वर्चस्व दिखता है. हालांकि, इस बार इन सीटों पर काफी बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों या दूसरी पार्टियों के प्रत्याशी के उतरने से कांग्रेस के लिए काम मुश्किल हो गया है. वहीं, बागी नेता अलग से दिक्कतें पैदा कर रहे हैं.
गोपाल गहलोत पिछड़ी माली समुदाय से आते हैं. कांग्रेस की पहली लिस्ट में उन्हें बीडी कल्ला से रिप्लेस कर दिया गया. जिससे नाराज होकर गोपाल गहलोत ने पार्टी से अलग जाकर बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ने का फैसला लिया. उनका चुनाव चिह्न कैंची का जोड़ा है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पिछले हफ्ते अपने तय कार्यक्रम से इतर जाकर बीकानेर पहुंच गए और वहां पार्टी के लिए एक जनसभा भी की. साथ ही रोड शो के जरिए पार्टी कैडर को मजबूत करने की कोशिश की.
कांग्रेस इस चुनाव में कैसे कुछ चुनिंदा सीटों पर पैराशूट उम्मीदवार ला रही है, बीकानेर सीट इसका सिर्फ एक उदाहरण हैं. ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं. हाल ही में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे एक पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री, तीन पूर्व जिला अध्यक्ष, पूर्व महासचिव, पूर्व सचिव और नौ पूर्व विधायकों सहित 28 नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है.
ये लोग पार्टी से हुए निष्कासित
जिन लोगों को निकाला गया है उनमें पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व खंडेला से अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे महादेव सिंह खंडेला, राज्य के पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर,करणपुर के पूर्व जिला अध्यक्ष पृथ्वीपाल सिंह संधू, बूंदी के पूर्व जिला अध्यक्ष सी एल प्रेमी, किशनगढ के पूर्व जिलाध्यक्ष नाथूराम सिनोदिया, पूर्व चेयरमैन राजस्थान घुमंतू—अद्र्घुमंतू बोर्ड गोपाल केसावत सहित 28 नेता शामिल हैं. अब जाहिर सी बात है कि ये नेता चुनाव के ऐन वक्त पहले पार्टी से निकाले जाने के बाद चुप होकर बैठे तो नहीं रहेंगे. ये नेता निर्दलीय होकर चुनाव लड़ रहे हैं.
क्या कांग्रेस का हाथ थामेगी जनता
कांग्रेस के सह प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल ने स्वीकार किया है कि बागी नेताओं ने पार्टी के लिए चुनौतियां पैदा की हैं. लेकिन, उनका ये भी कहना है कि इससे राजस्थान चुनाव में कोई असर नहीं पड़ेगा. पार्टी अपने मुद्दों पर ही चुनाव लड़ रही है. बंसल कहते हैं, 'बागियों से थोड़ा बहुत असर तो होगा, मगर इस बार चीजें कांग्रेस के पक्ष में हैं. बीजेपी के विकल्प के तौर पर लोग पार्टी को वोट देंगे.
जो भी हो राजस्थान में इस बार जनता कांग्रेस का 'हाथ' थामेगी या बीजेपी का कमल खिलाएगी इसका फैसला तो नतीजे आने के बाद होगा.
बीकानेर सीट इसी का उदाहरण है. पूर्वी और पश्चिमी बीकानेर गंगा शहर रोड पर आकर मिलती है, जिसे जीएस रोड के नाम से जाना जाता है. ये रोड उत्तरी राजस्थान के सबसे बड़े कॉमर्शियल हब को दो हिस्सों में बांटती है. इस बार पूर्वी और पश्चिमी बीकानेर सीट से कांग्रेस से निष्कासित जिला अध्यक्ष गोपाल गहलोत बागी नेता के तौर पर चुनावी मैदान में हैं
कांग्रेस ने राज्य में कुल 15 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है. कहा जाता है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कांग्रेस पार्टी का काफी वर्चस्व दिखता है. हालांकि, इस बार इन सीटों पर काफी बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों या दूसरी पार्टियों के प्रत्याशी के उतरने से कांग्रेस के लिए काम मुश्किल हो गया है. वहीं, बागी नेता अलग से दिक्कतें पैदा कर रहे हैं.
गोपाल गहलोत पिछड़ी माली समुदाय से आते हैं. कांग्रेस की पहली लिस्ट में उन्हें बीडी कल्ला से रिप्लेस कर दिया गया. जिससे नाराज होकर गोपाल गहलोत ने पार्टी से अलग जाकर बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ने का फैसला लिया. उनका चुनाव चिह्न कैंची का जोड़ा है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पिछले हफ्ते अपने तय कार्यक्रम से इतर जाकर बीकानेर पहुंच गए और वहां पार्टी के लिए एक जनसभा भी की. साथ ही रोड शो के जरिए पार्टी कैडर को मजबूत करने की कोशिश की.
कांग्रेस इस चुनाव में कैसे कुछ चुनिंदा सीटों पर पैराशूट उम्मीदवार ला रही है, बीकानेर सीट इसका सिर्फ एक उदाहरण हैं. ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं. हाल ही में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे एक पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री, तीन पूर्व जिला अध्यक्ष, पूर्व महासचिव, पूर्व सचिव और नौ पूर्व विधायकों सहित 28 नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है.
ये लोग पार्टी से हुए निष्कासित
जिन लोगों को निकाला गया है उनमें पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व खंडेला से अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे महादेव सिंह खंडेला, राज्य के पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर,करणपुर के पूर्व जिला अध्यक्ष पृथ्वीपाल सिंह संधू, बूंदी के पूर्व जिला अध्यक्ष सी एल प्रेमी, किशनगढ के पूर्व जिलाध्यक्ष नाथूराम सिनोदिया, पूर्व चेयरमैन राजस्थान घुमंतू—अद्र्घुमंतू बोर्ड गोपाल केसावत सहित 28 नेता शामिल हैं. अब जाहिर सी बात है कि ये नेता चुनाव के ऐन वक्त पहले पार्टी से निकाले जाने के बाद चुप होकर बैठे तो नहीं रहेंगे. ये नेता निर्दलीय होकर चुनाव लड़ रहे हैं.
क्या कांग्रेस का हाथ थामेगी जनता
कांग्रेस के सह प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल ने स्वीकार किया है कि बागी नेताओं ने पार्टी के लिए चुनौतियां पैदा की हैं. लेकिन, उनका ये भी कहना है कि इससे राजस्थान चुनाव में कोई असर नहीं पड़ेगा. पार्टी अपने मुद्दों पर ही चुनाव लड़ रही है. बंसल कहते हैं, 'बागियों से थोड़ा बहुत असर तो होगा, मगर इस बार चीजें कांग्रेस के पक्ष में हैं. बीजेपी के विकल्प के तौर पर लोग पार्टी को वोट देंगे.
जो भी हो राजस्थान में इस बार जनता कांग्रेस का 'हाथ' थामेगी या बीजेपी का कमल खिलाएगी इसका फैसला तो नतीजे आने के बाद होगा.

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