अगर गर्दन के दर्द से परेशान है तो बदलें कुछ आदते - Find Any Thing

RECENT

Wednesday, January 16, 2019

अगर गर्दन के दर्द से परेशान है तो बदलें कुछ आदते

अगर गर्दन के दर्द से परेशान है तो बदलें कुछ आदते.

(If you have trouble with neck pain, change some habits)
कुछ लोग इतने व्यस्त होते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब किस बीमारी का हमला हो गया। व्यस्त दिनचर्या के कारण होने वाली बीमारियों में प्रमुख है गर्दन का दर्द।
गर्दन का काम शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग सिर को सहारा देना है और लचीलापन भी हमारे लिए बहुत जरूरी है। जब गर्दन में दर्द होता है तो हमारे लिए चिंता का विषय बन जाता है। हमारी पूरी दिन दर्द में ही निकल जाता है।
जानते है क्यों होता है यह दर्द:-
आज की जीवनशैली भी इस बीमारी का एक प्रमुख कारण है। 
लंबे समय तक ऑफिस या घर में कंप्यूटर पर काम करना इसका एक सबसे बड़ा कारण साबित हो रहा है।
तकिए का इस्तेमाल करना, जो ज्यादा ऊंचा या बहुत नीचा हो, भी गर्दन में दर्द का कारण बन सकता है। चिंता से भी गर्दन में दर्द हो सकता है 
फोन पर काफी देर तक गर्दन एक तरफ झुका कर बात करने से दर्द हो सकता है।
गर्दन की हड्डी, जो रीढ़ की हड्डी का ही हिस्सा है, में सात वर्टिब्रा होती हैं। इनके बीच सर्वाइकल डिस्क दो वर्टिब्रा को जोड़ने का कार्य करती है। इस कारण हम अपनी गर्दन को घुमा पाते हैं। लगातार बहुत अधिक असामान्य दबाव पड़ने पर डिस्क का क्षरण होने लगता है। इस कारण स्पाइनल कॉर्ड तंत्रिकाओं को दबाने लगती है। इसी वजह से गर्दन, कंधों और बांहों में दर्द, बांहों में कमजोरी, चक्कर आना और गर्दन घुमाने में दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
क्या कहते हैं डॉक्टर:-
मेट्रो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट (न्यूरो सर्जन) डॉ. अमिताभ गोयल के अनुसार, गर्दन के दर्द से राहत के लिए अनेक उपाय हैं, जिनसे 98 फीसदी तक मामले पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। समस्या को छुपाएं नहीं और न ही समय पर डॉक्टर के पास जाने से हिचकें। इससे समस्या और बढ़ेगी और इलाज भी मुश्किल होगा।
क्या हैं इलाज:-

  • नियमित शारीरिक व्यायाम और संतुलित पौष्टिक भोजन करें, जो इस रोग से बचाव का एक प्रमुख उपाय है।
  • विशेषज्ञ की देखरेख में सही तरीके से सोने, उठने, बैठने और भार उठाने की विधियां जाननी चाहिए।
  • सर्वाइकल कॉलर और लम्बोजेक्रल बेल्ट के इस्तेमाल से भी इस बीमारी से काफी राहत मिलती है।
  • टेलीफोन की जगह हेड फोन या स्पीकर फोन का इस्तेमाल करें।
  • सोते समय सही पॉस्चर का ध्यान रखें।

No comments:

Post a Comment

Pages