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Tuesday, March 12, 2019

क्यों परेशान है कांग्रेस फैक्टर से सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा

क्यों परेशान है कांग्रेस फैक्टर से सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा

(Why the trouble is the SP-BSP coalition and the BJP from Congress Factor)

उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाले राज्यों में जबरजस्त मुकाबला होगा. ऐसे में सबकी नजरें केवल कांग्रेस फैक्टर' पर लगी हुए है. यह फैक्टर उस राज्य में कैसे काम करेगा जहां 80 सीटें दांव पर है? क्या इससे बीजेपी को फायदा होगा, क्योंकि उसके खिलाफ एसपी-बीएसपी-आरएलडी का मजबूत विपक्षी खड़ा है या फिर गठबंधन को फायदा मिलेगा? यूपी की राजनीति में प्रियंका के उतरने के बाद इसमें बदलाव आया है और कांग्रेस चुनावों में बड़ी भूमिका निभाने के लिए रेडी है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक यूपी में 'कांग्रेस फैक्टर' दोधारी तलवार हो सकती है. यूपी में कांग्रेस, बीजेपी को कुछ सीटों पर नुकसान पहुंचा सकती है, लेकिन कई सीटों पर गठबंधन के लिए चिंता का कारण बन सकती है.
सबसे पहले राज्य की उन 11 सीटों पर नजर दौड़ाते हैं जिन पर हाल ही में कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा की है. उन्नाव और धौरहरा को देखना दिलचस्प होगा. कांग्रेस ने इन सीटों पर अनु टंडन और जितिन प्रसाद को चुनाव मैदान में उतारा है. 2009 और 2014 के चुनाव परिणामों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि 2014 में कांग्रेस से बीजेपी की तरफ बड़ी संख्या में वोटों का ट्रांसफर हुआ. 2009 में कांग्रेस को उन्नाव में 4.75 लाख से अधिक वोट मिले थे, जबकि बीजेपी को केवल 57,000 वोट मिले . 2014 में बीजेपी को 5.18 लाख वोट मिल गए जबकि कांग्रेस को 1.97 लाख पर फिसल गई. इसी तरह धौरहरा में कांग्रेस को 2009 में 3.91 लाख वोट मिले, जबकि बीजेपी सिर्फ 25,000 वोट पाने में ही कामयाब रही थी. 2014 में मोदी लहर पर सवार बीजेपी को 3.60 लाख से अधिक वोट मिल गए और कांग्रेस को 2 लाख से अधिक वोटों का नुकसान हुआ.
बीजेपी भले ही विपक्षी चुनौती को खारिज कर रही है लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने त्रिकोणीय मुकाबले पर संतोष व्यक्त किया है. पार्टी के राज्य प्रवक्ता हीरो वाजपेयी कहते हैं, "हमारी नजर 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर पर है इसलिए एकजुट विपक्ष और प्रियंका गांधी फैक्टर का हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
शर्मा आगे कहते हैं कि बहुत कुछ अन्य महत्वपूर्ण फैक्टर्स पर भी निर्भर करेगा जैसे कि प्रियंका गांधी फैक्टर, एसपी के बागी शिवपाल यादव के राजनीतिक संगठन का प्रदर्शन और सबसे महत्वपूर्ण बात अगर एसपी-बीएसपी एक दूसरे को वोटों का ट्रांसफर सही तरीके से कराने में सफल हो पाते हैं.

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