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Wednesday, October 24, 2018

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: देश भर में बीएस-3 तक के वाहनों की बिक्री नहीं होगी

ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले बीएस-3 मानक के वाहनों की बिक्री से साफ इन्कार कर दिया है। बीएस-3 मानक वाले वाहनों को कुछ और समय तक बेचने की ऑटो निर्माता कंपनियों और डीलरों की मांग ठुकराते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि पहली अप्रैल 2017 से बीएस-3 मानक वाले नए वाहनों की बिक्री नहीं होगी।

गाड़ियों का पंजीयन भी तभी होगा जब इसका सुबूत हो कि गाड़ी 31 मार्च तक खरीदी गई है। पहली अप्रैल से पूरे देश में सिर्फ बीएस-4 मानक पूरा करने वाले ही दोपहिया, तिपहिया, चौपहिया या कॉमर्शियल वाहन बेचे जाएंगे या पंजीकृत किए जाएंगे।

न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे आम जनता की सेहत को होने वाले नुकसान का ख्याल रखते हुए ये आदेश सुनाया है। कोर्ट के इस फैसले ने उन वाहन कंपनियों के लिए बड़ी मुसीबत पैदा कर दी है जिनके पास बीएस-3 मानक वाले काफी वाहन हैं।
कोर्ट ने कहा कि बीएस-3 वाहनों से सड़क का उपयोग करने वाले लाखों लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। देश में कुल वाहनों की तुलना में इन वाहनों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन कंपनियों के व्यवसायिक हित और उन्हें होने वाले नुकसान की तुलना में लोगों की सेहत कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अदालत ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियां इस बात से पूरी तरह वाकिफ थीं कि एक अप्रैल 2017 से उन्हें सिर्फ बीएस-4 मानक के वाहनों का ही उत्पादन करना है लेकिन पता नहीं किस कारण से वे चुपचाप बैठी रहीं और इस ओर कदम नहीं बढ़ाया।
कोर्ट ने आदेश दिया कि कोई भी वाहन निर्माता कंपनी और डीलर एक अप्रैल से बीएस-4 मानक पूरा न करने वाला वाहन भारत में नहीं बेचेगा और न ही ऐसा वाहन पंजीकृत किया जाएगा। कोर्ट फैसले के विस्तृत कारण बाद में देगा। इस मामले में केंद्र सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी थी कि बीएस-4 मानकों के वाहनों के लिए गुणवत्ता वाला ईंधन एक अप्रैल 2017 से पूरे देश भर में उपलब्ध होगा।
ये हैं बीएस मानक
वाहनों के इंजन से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए योरपीय देशों के यूरो मानक की तर्ज पर वर्ष 2000 से भारत में स्टेज उत्सर्जन मानक लागू किए गए। अब तक भारत स्टेज-4 तक के मानक बन चुके हैं।
सरकार ने पांचवें मानक नियमों को लागू करने की बजाए 2020 से सीधे बीएस-6 मानक लागू करने का फैसला किया है।
भारत स्‍टेज-4 ने डीजल कारों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्‍साइड में 68 फीसदी और पेट्रोल इंजन वाली कारों से 25 फीसदी की कमी की है।
डीजल इंजन वाली कारों से हाने वाले पार्टिकुलेट मैटर उत्‍सर्जन जो कैंसर की वजह बनते हैं, में भी अभूतपूर्व 80 फीसदी की कमी होगी।

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