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Monday, November 26, 2018

मार्च 2019 तक देश के आधे एटीएम बंद होते हैं तो हो सकती है नोटबंदी जैसे हालात

8 नवंबर 2016 में किए गए नोटबंदी के फैसले की यादें अभी पूरी तरह से मिटी नही हैं. बैंकों में पुराने नोट लिए और जरूरत के लिए करेंसी निकालने के लिए लंबी- लंबी लाइनों को लोग याद करते ही डर जाते हैं. 

करीब 50 दिन तक पूरे देश में ऐसी ही हालत थे. इस फैसले के पीछे कालाधन और भ्रष्टाचार मिटाने की कवायद है. हालांकि अभी तक यह बहस का मुद्दा है कि इससे से क्या फायदा हुआ है. वहीं अगर आपसे कोई कहे कि नोटबंदी फिर आने वाली है. दरअसल उद्योग संगठन कंफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री ने हाल ही में आगाह किया है कि मार्च, 2019 तक देश के आधे एटीएम बंद हो सकते हैं. इस पर अर्थशास्त्रियों ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर मार्च, 2019 तक देश के आधे एटीएम बंद होते हैं तो देश में नकदी की कमी, बैंकों में लंबी-लंबी कतारें और एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात बन सकते हैं. अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज, अर्थशास्त्र के सहायक प्रोफेसर और अर्थशास्त्री अमित बसोले ने बेंगलुरू से आईएएनएस को ई-मेल के माध्यम से बताया, "जी हां, अगर मार्च 2019 तक देश के आधे एटीएम बंद होते हैं तो देश में नकदी की कमी, बैंकों में लंबी-लंबी कतारें और एक बर फिर नोटबंदी जैसी समान स्थिति उत्पन्न होगी. कैटमी ने बीते बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा था कि एटीएम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड के साथ ही नकदी प्रबंधन योजनाओं के हालिया मानकों के चलते मार्च 2019 तक संचालन के अभाव में 50 फीसदी एटीएम बंद हो जाएंगे.एक या दो एटीएम मशीनें हैं और लोगों को पैसे मिलने में कठिनाई होती है उन जगहों पर एटीएम मशीन की संख्या बढ़ाने के बजाय इनको बंद करना क्या सही निर्णय होगा? इस पर अमित बसोले ने कहा, एटीएम मशीनों को बंद करना सही निर्णय नहीं है. इनको आवश्यक रूप से अपग्रेड करना सही काम है। लेकिन एटीएम उद्योग का दावा है कि वे ऐसा करने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं. हालांकि मेरे पास इन दावों के विवरण की पर्याप्त जानकारी फिलहाल नहीं है." इंडस्ट्री बॉडी ने एक बयान में कहा है कि एटीएम मशीनों के बंद होने से हजारों नौकरियों और सरकार के वित्तीय समावेशन के प्रयासों पर भी असर पड़ेगा.अगर एटीएम मशीनें बंद होती हैं तो नतीजतन लंबी लाइनें लगती है और नकदी की कमी आदि होती ही है. हां इससे अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी. लेकिन प्रभाव की सीमा पहले बता पाना थोड़ा मुश्किल है." क्या एटीएम मशीनों में कैश डालने वाली वैनों से लूटपाट होने की घटनाएं भी मशीनों को बंद करने का कारण हो सकती हैं. इस पर अर्थशास्त्री ने कहा, "वैन के लिए सुरक्षा उपाय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सुझाए गए कई बदलावों में से एक हैं. आरबीआई एटीएम उद्योग से वैनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कह रहा है। हालांकि इसके पीछे यह एकमात्र कारण नहीं है.

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