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26.12.18

प्रधानमंत्री ने असम में बोगीबील पुल का उद्घाटन किया, जानिए क्या हैं इसकी खासियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2018 को असम के डिब्रूगढ़ जिले में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे रेल/रोड ब्रिज बोगीबील का उद्घाटन किया. यह ब्रिज 4.94 किलोमीटर लंबा है. यह ब्रिज भारत-चीन बॉर्डर एरिया में काफी महत्तवपूर्ण भूमिका निभाएगा|

हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन ने इस पुल को मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग, ड्राई पेनिट्रेशन टेस्टिंग तथा अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग जैसी आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल करके इसे यूरोपीय मानकों के अनुरूप बनाया है. यह पुल अरुणाचल में बॉर्डर के समीप भारत यातायात सुगम बनाने के प्रोजेक्ट का हिस्सा है|

 ब्रिज का सबसे बड़ा फायदा
बोगीबील ब्रिज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सेना को दक्षिण से उत्तर की ओर आसानी से भेजा जा सकेगा. इसका अर्थ है कि दक्षिण से उत्तर की ओर भारत-चीन बॉर्डर तक सेना को भेजने में सैकड़ों किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी|

इस परियोजना का शिलान्यास 22 जनवरी 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा द्वारा किया गया था. हालांकि इस पर काम की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में 21 अप्रैल 2002 को हुई. परियोजना में हुई देरी के कारण इसकी लागत 85 फीसदी तक बढ़ गई.इस ब्रिज के रणनीतिक महत्व को देखते हुए 2007 में इसे राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट घोषित कर दिया गया. यह ब्रिज पूर्वी क्षेत्र में तेजी से सेना और हथियारों की आवाजाही को बढ़ाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाएगा. यह इस तरह से बनाया गया था कि इमरजेंसी में इस पर लड़ाकू जेट भी उतारा जा सकता है. तकनीक के प्रयोग के कारण एयरफोर्स को तीन लैडिंग पट्टियां उपलब्ध हो पाएंगी|

सबसे लंबा रेल/रोड ब्रिज
हालांकि बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी की चौड़ाई 10.3 किलोमीटर है लेकिन रेलवे पुल बनाने के लिए यहां तकनीक लगाकर पहले नदी की चौड़ाई कम की गई और फिर इस पर करीब 5 किलोमीटर लंबा रेल/रोड ब्रिज बनाया गया है. यह भारत का सबसे लंबा रेल/रोड ब्रिज है|

सेना को बड़ी ताकत
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यहां से 450 किलीमीटर दूर गुवाहाटी में ही ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए नदी पर पुल मौजूद है. जबकि सड़क पुल भी यहां से करीब 250 किलोमीटर दूर है. ऐसे भी आम लोगों की सुविधा के अलावा फौजी ज़रूरतों के लिहाज से यह पुल सेना को बड़ी ताकत देगा|

 ब्रिज को बनाने में चुनौतियों का सामना|
इस ब्रिज को बनाने में इंजीनियरों को कई तरह की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है. सबसे पहले तो उन्हें यहां मार्च से लेकर अक्टूबर तक होने वाली बारिश के बाद ही काम करने का समय मिलता था. इसके अलावा नदी के पानी के भारी दबाव में होने के नाते किसी भी तरफ से मिट्टी का कटाव शुरू हो जाता है और कहीं भी टापू बन जाता है ऐसे में काम करना या फिर लोकेशन बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है. लेकिन इन सबसे निपटकर पहली बार रेलवे ने स्टील गर्डर का इस्तेमाल कर इतना बड़ा पुल बनाया है. इस पुल में कहीं भी रिवेट्स नहीं लगाए गए हैं बल्कि हर जगह लोहे को वेल्ड किया गया है जिससे इसका वजन 20 प्रतिशत तक कम हो गया और इससे लागत में भी कमी आई है|

बोगीबील ब्रिज का खासियत|
बोगीबील पुल भूकंप प्रभावित क्षेत्र में है, इस पुल को भूकंपरोधी बनाया गया है जो 7 तीव्रता से ज्यादा के भूकंप में भी धराशायी नहीं होगा|
 ब्रह्मपुत्र नदी पर डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज (बोगीबील पुल) की सहायता से असम और अरुणाचल राज्यों के बीच लोग आसानी से आ-जा सकेंगे|बोगीबील पुल चीन के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है और सेना को इस पुल से जरूरत पड़ने पर खासी मदद मिलेगी|

अभी डिब्रूगढ़ से अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए व्यक्ति को गुवाहाटी होकर जाना होता है और उसे 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी होती है. इस पुल के निर्माण से से यह यात्रा अब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी| यह पुल असम के धेमाजी जिला और डिब्रूगढ़ जिला को जोड़ता है. बोगीबील ब्रिज का जीवनकाल 120 साल बताया गया है|

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